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मेरी माँ

मेरी माँ

जिसके होंठों पर कभी बद्दुआ नहीं होती है,
बस माँ है जो मुझसे कभी खफा नहीं होती है।

इस जग में कोई भी चीज माँ से बड़ी नही होती है,
मुझे दुखी देख आज भी उसकी ममता रोती है।

वो खुद से पहले खाना मुझे खिलाती थी,
पकड़ उंगली मेरी चलना मुझे सिखाती थी।

जरा सी चोट लग जाती मुझे माँ दौड़ी आती थी,
अपने आंसू छिपाती जख्मों पर दवा लगाती थी।

कैसा बचपन था माँ की गोद में ही नींद आती थी,
मुझे देखकर माँ खुशियों से फूली नहीं समाती थी।

मैं थोड़ा जिद्दी था फिर भी वो समझाती थी,
कभी रूठ जाऊं मैं तो वो मुझे मनाती थी।

जिंदगी के सफर में जब मैं रास्ते भटक जाता हूँ,
माँ की दुआओ से मैं हरदम सम्भल जाता हूँ।

जीवन की हर घड़ी में तेरा साथ जरूरी है,
बिन तेरे माँ जीवन की हर खुशी अधूरी है।

और अब क्या लिखूँ लफ्जों में बयां नहीं कर सकता माँ,
ईश्वर भी जिसकी ममता के आगे झुके ऐसी होती है माँ।

✍️
नवनीत शुक्ल(स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय 
शि०क्षे०:-हसवां
जनपद:-फतेहपुर
मूल निवास-रायबरेली


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