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अंतर्दृष्टि

March 10, 2015
तुमने चाहा क़ि मैं गांधारी बन जाउँ बाँध लूँ अपनी आँखों पर पट्टियां मैंने बाँध भी ली पर कानो से सुना आहटों से पहचाना अपमान ,छल,घुटन प्र...Read More

वक़्त की नेमतें

February 12, 2015
एक दिन यूँ ही अचानक दरमियाने तन्हाई.... वक़्त की अबूझ इबारतें पढ़ते, पूछ बैठी वक़्त से क्यूँ इतने दुश्वार हो? फूल हो या ख़ार हो...? उम्र...Read More

जीवन चक्र

January 26, 2015
जन्म' आह्लाद की गठरी। ठहाके.... फ़िर... पथ संघर्ष का और उसपर घिसटता काल चक्र और उससे स्पर्धा करता जीवन और पीछे छूटते.... ...Read More