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मेरी माँ

मेरी माँ

तू ही जननी तू ही सब कुछ, 
तुझमें समाया सब संसार है।
ममता   की  तेरी  छाँव  मे,
 सिमटी खुशियाँ अपार हैं।।

आँखें खुली तो तुझको देखा,
तुझमें ही तो सब ज्ञान है,
कैसे कह दूँ कि बहुत पर्याय हैं माँ के,
साक्षात तू ही तो मेरा भगवान है।।

तू ही शक्ति तू ही प्रेरणा,
तू ही सर्वशक्तिमान है।
 मेरा हर कदम तेरा ऋणी,
ये मुझ पर तेरा अहसान है।।

तेरी हर खुशी मेरी खुशी,
कोई मोल नहीं तेरे प्यार का।
तेरा साया सदा मुझ पर रहे, 
ये भगवान से मेरी अरदास है।।

कान्हा की तू मैया बनी,
बनी गजानन की माता।
तू सदा मेरी मैया बने,
यही तो मेरी शान है।।

हिमांशु' की है ये सबसे गुजारिश,
सबको करना माँ का सम्मान है।
कोई तकलीफ आये जब उसको,
तो खुद का त्याग देना आराम है।।

आओ सब याद कर लो उसको,
जिसने दिए हर पल बलिदान हैं।
मुस्कराकर चरण छू लो उसके,
बस यही तो उसका अभिमान है।।


✍️
ललित कुमार 'हिमांशु'(प्रधानाध्यापक)
संविलयन विद्यालय बडढा वाजिदपुर  
विकास क्षेत्र-स्याना
बुलंदशहर

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