शिक्षक की व्यथा
शिक्षक की व्यथा
सेवारत की टेट बाध्यता हटाओ।
पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कराओ।
कितनी छोड़े कितनी बताये?
कब समझोगे हमारी व्यथाएँ?
शैक्षणिक हो या गैर-शैक्षणिक हो कार्य।
प्राथमिकता से सेवा देते हम अनिवार्य ।
छोड़ते नहीं कोई कोर कसर।
बेहतर प्रयास का हो असर ।
मानक के अनुरूप हुई नियुक्ति क्यों पापी कहलाये।
विषमता,विवशता को नॉन-टेट शिक्षक अंगीकार करते आए।
क्या टेट क्या नॉन टेट? एक है सबका दर्द।
मिलकर हम सुरक्षित और सम्मानित जीवन की लगाते अर्ज।
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शिखा पाण्डेय
(सहायक अध्यापिका)
प्राथमिक विद्यालय पिपरी
विकास खंड-बेलघाट
जनपद-गोरखपुर।
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