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पांच सिक्के

नवंबर 28, 2014
यूं बीता समय जैसे; हाथ से रेत फिसलती है, किस्मत भी न जाने कैसे;  तस्वीर बदलती है, बह जाते हैं झरने की तरह; अरमानों के समंदर , जमीन ...Read More