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रिश्तों की बगिया

रिश्तों की  बगिया

छोटी-छोटी बातों में ही,
 छुपा हुआ अनुराग है,
रिश्तों का यह ताना-बाना,
 प्रेम भरा एक फाग है।

साथ चलें तो कट जाते हैं, 
कठिन राह के हर काँटे,
सच्ची ख़ुशी वही होती है, 
जो अपनों के संग बाँटे।

धूप पड़े या छाँव ढले,
हाथों में बस हाथ रहे।
सुख आए या दुख आए,
 बस अपनों का साथ रहे।

एक-दूजे को समझ सकें हम,
ऐसी समझ की प्यास रहे,
दूर भले हों नैनों से पर,
दिल में हमेशा पास रहे।

कभी रूठना कभी मनाना,
यह तो प्रेम की भाषा है।
सूखे मन में उम्मीद जगाना,
मीठी सी एक आशा है।

माफ़ करें और भूल जाएँ सब,
यही तो असली प्यार है,
रिश्तों की इस बगिया में ही,
बसता पूरा संसार है।


धागा हो विश्वास का ऐसा,
जो कोई तोड़ न पाए।
वक्त भले ही कैसा आए,
मुस्कान कभी न ये जाए ।

प्यार बाँटते चलें सदा हम,
यही हमारी चाहत हो,
हर रिश्ते की छाँव में बस,
सदा सुहानी राहत हो।

कड़वी बातें भूल के यारा,
मीठी यादें चुनते जाएँ।
बिना कहे जो दिल समझ ले,
ऐसी धुन हम सुनते जाएँ।


एक-दूजे के सपनों को जब,
हम पंख नए दे पाते हैं,
सच्ची चाहत के धागे से,
हर बंधन को सजाते हैं।

सुनो ध्यान से कभी-कभी तो,
ख़ामोशी भी गाती है।
दिलों के तार मिले हों जब तो,
दूरियाँ मिट जाती हैं।

न कोई शिकवा, न कोई दावा,
बस एक सहज सा अपनापन,
जहाँ मिले सम्मान और आदर,
महक उठेगा वो ही जीवन।


आओ मिलकर दीप जलाएँ,
निःस्वार्थ प्रेम के आँगन में।
नफ़रत को कोई जगह न मिले,
इस पावन से जीवन में।

चलते-चलते राहों में हम,
प्यार के मोती बोते जाएँ,
रिश्तों की इस सुंदर बगिया को,
सदा ख़ुशी से सींचते जाएँ।


आशीष शुक्ल
प्राथमिक विद्यालय पूरा बहादुर
विकास खंड टड़ियावां
जनपद हरदोई
📞8182814271



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