मैं हिंदी हूं
मैं हिंदी हूं
हवाओं की सरसराहट में
झरने की झरझराहट में
समुद्र की सनसनाहट में
सर्दी की झुरझुराहट में
पतझड़ की चुरमुराहट में
किसी द्वार से आती आहट में
मैं हिंदी हूं
मैं तो बच्चे की लोरी हूं
एक सुंदर सी छोरी हूं
किसी गांव की गोरी हूं
मैं तो बहुत ही भोरी हूं
रंगों से भरी मैं होरी हूं
शब्दों से भरी बोरी हूं
किसी राजमहल मोरी हूं
मैं हिंदी हूं
तबले की थाप में मैं हूं
चूल्हे की ताप में मैं हूं
चाय की भाप में मैं हूं
भय की कांप में मैं हूं
खुसरों की छाप में मैं हूं
सबके आलाप में मैं हूं
समझो तो आप में मैं हूं
मैं हिंदी हूं
✍️
आमिर फारूक
सहायक अध्यापक
उप्रावि संजरपुर बालजीत
विकास क्षेत्र उझानी
जनपद बदायूं
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