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शिव-स्तुति

शिव-स्तुति 
वर्ण-माला क्रमानुसार


"अ"घ-अवगुण सब हर लो शम्भो,
दीनों के रखवारे।
"आ"दि-अनादि महेश तुम्हीं हो,
जग के नाथ हमारे॥

"इ"न्दु-शिखर त्रिनयन तुम्हारे,
शोभित भाल सुहाना।
"ई"श उमापति दयासिन्धु,
चरणों में हमें लगाना॥

"उ"मापति उर वास करो अब,
हर लो मोह अँधेरा।
"ऊ"र्ध्व-जटा में गंग तरंगें,
डालें पावन डेरा॥

"ऋ"षि-मुनि ध्यान धरें जिनका नित,
वे शंकर भगवान।
"ए"क तुम्हीं आधार जगत के,
तुम ही प्राण-निधान॥

"ऐ"से तुम हो अगम अगोचर,
वेद न पाते पार।
"ओं"कार स्वरूप महेश्वर तुम,
हो जगत आधार ॥

"औ"घड़दानी भोले शंकर,
दीनों के उपकारी।
"अं"तर्यामी अंतर्मन से,
सुन लो विनय हमारी॥

"अः" नादमय हे परमेश्वर,
मन में ज्योति जगाओ।
"क"र में डमरू डिम-डिम बोले,
नाद अनोखा गाओ।।

"ख"प्पर धारण भस्म रमाए,
रूप तुम्हारा न्यारा।
"गंगा" लहर-लहर कर लहरें,
लसे धवल सी धारा।।

"घं"टा-नाद गुंजे हिय हर्षे,
हर-हर शब्द सुनाए।
"च"न्द्रकला मस्तक पर शोभे,
शीतल ज्योति लुटाए।।

"छ"वि निहारत नयन अघाते,
मन आनंद समाओ।
"ज"ग के स्वामी जगदीश्वर तुम,
जग पर प्यार लुटाओ।।

"झ"र-झर गंगा चरण पखारे,
देव तुम्हें नित ध्याते॥
"टं"कारें त्रिशूल करें जब,
दुष्ट सभी डर जाते।।

"ठा"कुर मेरे भोले बाबा,
तुम बिन कौन संभाले॥
"डि"म-डिम डमरू नाद सुनाए,
गूँजे सभी शिवाले।।

"ढूँ"ढ़े जग तुम्हें बाहर-बाहर,
तुम अंतर उजियारा।
"ती"नो लोक तेरा गुण गाए,
तेरा एक सहारा।।

"था"म लो हाथ पड़ा हूँ अनाथ,
तु भवसागर से खेना॥
"द"यासिंधु दीनों के दाता,
दुख-दरिद्र हर लेना।।

"धू"र्जटि धवल भस्म-विभूषित तन,
मन में शांति भरो॥
"न"न्दी वाहन द्वार तुम्हारे,
शम्भो कष्ट हरो।।

"प"शुपति पापों को हर लेते,
जो चरणों में आता।
"फ"णिधर हार गले में शोभे,
अद्भुत रूप सुहाता।।

"ब"म-बम बोले भक्त तुम्हारे,
तुम ही एक सहारा॥
"भ"व में तेरी अद्भुत महिमा,
तीनो लोक है हारा।।

"म"हादेव की महिमा अतुलित,
मैं तुमको नित ध्याऊँ।
"यो"गेश्वर जगदीश्वर शम्भो,
नित-नित ध्यान लगाऊँ।।

"रु"द्र रूप हो शांत रूप,
चरणों में शीश नवाऊँ।
"ल"गन लगा के तुमसे भगवन,
तेरी महिमा गाऊँ।।

"वि"श्वनाथ विश्वेश्वर स्वामी,
कृपा सदा ही बरसे।
"शि"व शंकर शरणागतवत्सल,
दर्शन को मन तरसे।।

"ष"ड्रिपु जीत सकूँ हे शम्भो,
ऐसा मुझे बनाना।
"स"दा सत्य से स्नेह करूँ प्रभु,
अंतर-ज्योति जलाना।।

"ह"र-हर महादेव की ध्वनि से,
मन-मंदिर महकाओ॥
"क्ष"माशील कैलासपति प्रभु,
हमको गले लगाओ।।

"त्रि"पुरारी अविकारी शम्भो,
सुनलो ये फरियाद।
"ज्ञा"नस्वरूप जगद्गुरु भगवन,
हर लो दुःख विषाद ।।

✍️
रमेश तिवारी"कमल"
प्रभारी प्रधानाध्यापक
प्राथमिक विद्यालय हरमंदिर खुर्द,फरेन्दा,महराजगंज,(उत्तर-प्रदेश)
जंगम-वाणी संख्या-९८३९२५३८३३

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