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पतंग

November 27, 2017
दूर गगन में दौड़ लगाती, कभी बादलों में छिप जाती। नीले काले पीले रंग, देखो देखो उड़ी पतंग। इधर  गयी कभी उधर गयी, कभी डोर से उलझ गयी। ...Read More

चन्दा का स्वेटर

October 17, 2017
  रूठे चन्दा प्यारे एक दिन ,माता से यह बोले बुन दो मुझको भी एक स्वेटर,लाकर ऊन के गोले। गर्मी चली गयी है अब तो सर्दी को है आना, आसमान...Read More

अब हम आ गए शहर

May 28, 2017
बेटा मेरा एक साल का , है मगर बड़ा वह कमाल का, आज सुबह जब आँख खुली तो, उसको बैठा पाया । निहार रहा था खिड़की से , पर सूरज नजर न आया । म...Read More