जनगणना 2027
जनगणना 2027
-------------------------------
गाँव- गाँव और नगर नगर,
घूम रहीं हैं डगर -- डगर ,
लेकर आँकड़ों की झोली,
निकलीं जनगणना की टोली ।
कभी भाव को कभी ताव को ,
एक- एक करके झेल रहे हैं ,
बादस्तूर ऐप से खेल रहे हैं,
बिना भेद के सबको ठेल रहे हैं ।
है नहीं आँकड़ों का ये जाल,
शोभित इससे भारत माँ का भाल ,
ज्ञात इसी से होगा सबका हाल ,
है कहाँ ठहरना कहाँ बढ़ानी चाल ।
ये एक दशक की झाँकी
कितनी मिली सफलता हमको,
और मंजिल है कितनी बाकी
आँकड़ों ने बातें सच- सच राखी ।
जनगणना की प्रश्न चालीसा,
इसे बड़े ध्यान से जपना,
यह नीति निर्धारण की कसौटी,
है विकसित भारत का सपना।
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण,
सब भारत- भू के वासी ,
अगड़े पिछड़े दलित मिलें,
हों खानाबदोश या आदिवासी ।
रहते हों महल झोपड़ों में
चाहे हों बेघर, चलवासी ,
गणना सबकी करनी है ,
ग्रीष्म तपे या शीत पड़े,
चाहे धुंआधार पड़े पानी ।
✍️
प्रदीप तेवतिया
8859850623
कोई टिप्पणी नहीं