मुखौटे
मुखौटे
चेहरे पर लगाए मुखौटे हज़ार,
कैसा है दुनिया का ये कारोबार!
यहाँ हर किसी को ज़रूरत का यार चाहिए,
बताओ, सच में किसको यहाँ सच्चा प्यार चाहिए?
ज़रूरत पड़ी तो गले से लगाया,
ज़रूरत न हो तो पराया बनाया!
मतलबी यहाँ हर एक अंदाज़ निकला,
मोहब्बत का हर सौदा दरवाज़ निकला!
बातें थीं कभी सात जन्मों की कसमें,
अब तो बदलती हैं पल-पल में रस्में।
जब तक जेब में थी कुछ रौनक या यारी,
तब तक अपनी सबसे अच्छी दुनियारी!
खत्म हुई जब सिक्के की खनक यार,
बदल गई आँखों की वो चमक यार!
काँच के जैसे थे रिश्ते बने हुए,
ज़रा सी ठोकर लगी और छन से टूटे हुए!
अंधेरों में कोई हाथ थामता नहीं,
आँसू यहाँ कोई किसी का साधता नहीं।
भीड़ बहुत है मगर सब हैं अजनबी यहाँ,
दर्द बांटने को कोई दिल मिलता नहीं!
सबको अपनी ही फिक्र और अपनी ही आस है,
मतलब की दुनिया में कौन किसका ख़ास है?
जीते हैं सब अपनी ही दुनिया में मगर,
अपनों के ही सीने में छुपाये हैं खंजर
दौर ऐसा है कि साया भी जुदा हो जाए,
वक़्त आने पे अपना भी ख़फ़ा हो जाए।
मतलबी इस जहाँ में वफ़ा कौन करे,
आग लग जाए तो जलता हुआ घर कौन तके?
अपने हाथों से ही अपनों को गिराया सबने,
मतलब के वास्ते रिश्ता ही मिटाया सबने!
मुस्कुरा कर जो गले रोज़ मिला करते थे,
पीठ पीछे वही खंजर भी सिला करते थे!
वक़्त की धूप में रिश्ते पिघल जाते हैं,
मुश्किलों में सभी चेहरे बदल जाते हैं।
कल तलक जो थे हमारे ही सहारे हरदम,
आज अनजान से बनके वो निकल जाते हैं!
अब किसी से कोई उम्मीद क्या रखें,
टूटे हुए दिल की ज़िद क्या रखें?
मतलबी इस दौर में तन्हा ही भले हैं हम,
दर्द सह कर भी जीने के काबिल बने हैं हम...
दर्द सह कर भी जीने के काबिल बने हैं हम!
✍️
आशीष शुक्ल
प्राथमिक विद्यालय पूरा बहादुर
विकास खंड टड़ियावां
जनपद हरदोई
8182814271
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