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हमारे पितृगण

हमारे पितृगण

पितरों का सुमिरन करें,श्रद्धा-भक्ति-विधान।
जिनके पावन पुण्य से,पुष्टित सकल जहान।।
पुष्टित सकल जहान,तिलांजलि, अर्घ्य चढ़ाएँ।
याद करें यव कुश ले, उनका मान बढ़ाएँ।।
जिनसे जीवन-पथ मिला,जिनसे मिला है तन।
पितरों का सुमिरन करें,खूब लगा के मन।।१।।

श्रद्धा सेवा से सदा, सुन्दर हो संसार।
पितृकृपा की छाँव ही, जीवन का आधार।।
जीवन का आधार, करें सत्कर्म हमेशा।
दीन-दुःखी सेवा से , हरदम मिटे कलेशा।।
सेवा, संयम, सत्य ही, बनें धर्म आधार।
श्रद्धा सेवा से सदा, सुखी रहे परिवार।।२।।

निर्मल हो अंतःकरण, निर्मल हो व्यवहार।
पितरों के आशीष से, अक्षुण हो संसार।।
अक्षुण हो संसार, द्वेष-दुर्भाव मिटाएँ,
कुल की मर्यादा-धर्म की, ज्योति जलाएँ।
सदाचार की साधना, जीवन का श्रृंगार,
निर्मल हो अंतःकरण, निर्मल हो व्यवहार।।३।।

पावन हो संसार यह, पितृकृपा के योग।
शांत रहें पूर्वज सभी, मिटें सकल दुर्योग।।
मिटें सकल दुर्योग, शोक-संताप निवारें,
उनके आशीषों से, जीवन सभी निखारें।
पीढ़ी दर पीढ़ी चले, संस्कारों का सार,
पावन हो संसार यह, जीवन हो गुलजार।।४।।

पूर्वज हैं आधार सृष्टि के, कुल दीपक हैं आप।
उनको याद किये  बिना, नहीं मिटे संताप।।
नहीं मिटे संताप, पाप कटता नहीं सारा,
श्रद्धा से तर्पण अर्पण, यह विनय हमारा।
उनके चरणों में गाएँ, अभिनदंन के गीत,
पूर्वज हैं आधार सृष्टि के,यही सृष्टि की रीति।।५।।

सत्य सनातन रीति को , नमन है बारंबार।
जिनसे निज अस्तित्व है, जिनसे कुल-संसार।।
जिनसे कुल-संसार, उन्हीं का यश हम गाएँ,
पूर्वज जन की रीति, संतति तक पहुँचाएँ।
श्रद्धा, सेवा, धर्म से, धरा रहे गुलजार,
सत्य सनातन रीति का,सभी करें सत्कार॥६।।

रमेश तिवारी"कमल"
प्रभारी प्रधानाध्यापक- प्राथमिक विद्यालय हरमंदिर खुर्द,
क्षेत्र- फरेन्दा 
जनपद- महराजगंज

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