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नववर्ष

April 01, 2016
कितनी सहजता से तारीखों के बदलते ही कैलेंडर बदल जाते, समय-परिस्थितियों के बीच माटी के तन में एक मन समेटते-सहेजते बनते-बिगड़ते एक...Read More

स्त्री - धर्म

March 08, 2016
स्त्री जीवन को धारण पालन- पोषण करती, धर्म जीवन जीने की अनुशासित - प्रेरक जीवन- शैली, स्वीकार होते दोनों आसानी से, तर्क- कुतर्क स...Read More

तितली के रंग

November 14, 2015
बचपन की प्यारी  ताज़गी का ढंग अभी बाकी है लम्हों में उनके जिंदगी का संग  अभी बाकी है खो जाये न कहीं बचपन-सुकून-सपनों के बगीचे नन्ही हथे...Read More

रोशनी का त्योहार

November 12, 2015
रोशनी होती दिलों में हमेशा प्यार से मिटायें हर ग़म का अंधेरा संसार से बेबसी के आँसू नही हों किसी आँख में सीखते हम यही रोशनी के त्योहार ...Read More

हौसला पतवार है

October 22, 2015
वक्त के आगे कहाँ चलता किसी का वार है जो नही समझे समय पर तो गया वो हार है कौन कितना है सही कोई कहे कैसे भला हम सही हैं तुम गलत हो बस यह...Read More

M.D.M का सोशल आडिट

October 12, 2015
पिछले चार वर्षों से नियुक्त हेडमास्टर मैडम ने रोज की तरह  विद्यालय समय से खोला, बच्चे और चार महीने पहले ही पहली बार विद्यालय को प्राप्त त...Read More

आन लाइन फार्म

September 27, 2015
लम्बी-लम्बी कतारों में मुरझा जाते चेहरे इंतजार करते-करते, आनलाइन दर्ज होनी थी बेरोजगारी की टीस, चालीस-छियालीस जगहों के लिए पाँच-छ...Read More

चेहरे

August 20, 2015
नकाबों में छुपे हैं चेहरे कितने झूठे थे ख्वाब जो, वो सुनहरे कितने निगाहें भी निगेहबां भी हमारे वो दिखाये अक्स जो, वो दोहरे कितने ---- ...Read More

कृतज्ञ राष्ट्र की भावभीनी श्रृद्धांजलि, सलाम हमारा आदरणीय कलाम जी को,,,

July 28, 2015
गर्व उन्नत भाल के थे सम्मान, विजय-तिलक सरीखे राष्ट्र-नयनों ने उनके संग निज स्वप्न हैं सफल देखे शिक्षक थे हिंदुस्तानी, तो शिक्षक समान ही ...Read More

थाह

June 22, 2015
कौन है अपना कौन पराया थाह मिलेगी कहाँ जो सरल है उसे सहजता से राह मिलेगी कहाँ जब तक न पहचानेंगे नयन रंग इस संसार के सपन को साकार करने की...Read More

क्या सूझी आपको

May 24, 2015
बैठकर  ए०सी० में महोदय आप तो हरते ताप को झुलसने बच्चों को बुलाया  क्या सूझी है आपको  खेत की मेंड़ पर बैठे तरसी आँखें पथराई हैं कुछ को ...Read More

चाह

May 16, 2015
अपनेपन की चाह अपने रिश्तों में रही दिल की बात दिल से हमने किश्तों में कही भावना की चाह है नही बात कमियों की हम भी तो इंसानों में फरिश्त...Read More

दर्द

April 27, 2015
सिहर - सहम उठता ये ज़माना हर आँख रोई जिंदगी ने जब- जब भी अर्थी मौत की ढोई कहीं टूटे सपनें किसी के छूट गये अपने पाया इस दर्द को जिसने कब...Read More

लौट आना प्रिये

April 20, 2015
उगते हुए सूरज हो तुम अभी, बहुत होगा वंदन - अभिनंदन पर दर्प से दीप्ति तुम्हारी प्रसन्नता जब चरम पर होगी, क्या देख सकोगे तुम किसी म...Read More

बंद कमरे

March 31, 2015
अंधेरे बंद कमरे कोने में दुबके से हैं दिन जिन्हें नसीब नही होता मुँह देखना कभी रोशनी का, हर मकान की खिड़कियां ,दरवाज़े बंद हैं इस...Read More

प्रश्नचिन्ह

March 22, 2015
तुम्हारी देहरी पर रखा दीपक प्रतीक्षा में रहा वर्षों तलक, कब दोगे विश्वास से भीगी स्नेह की बाती, एक दिन अचानक नेह के आशीष से भिगो...Read More

वनिता

March 07, 2015
ममता - प्यार मन में पिरोती हूँ, संवेदनायें भावनाएं हृदय में संजोती हूँ, सृजन -मानवता , संहार- दानवता के आधार भी बनती हूँ,, जीवन...Read More