कुछ यूँ ही...
कुछ यूँ ही... काँच के दिल हैं यहाँ, पत्थरों के शहर हैं, अमृत समझ के पी गए हम, जो मीठे से ज़हर हैं । होंठों पे झूठी हँसी, दिल में कपट का गुबा...Read More
प्राथमिक शिक्षकों की साहित्यिक दुनिया प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम primarykamaster