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लबों को प्यास तो देते हो

तुम रात की चमकती जुगनू की रोशनी हो,
राहें न सही रोशनी का एहसास तो देती हो।
हर किसी को जी भर प्याला न दे सको,
पर मेरे होंठों तरन्नुम को प्यास तो देती हो।

तुमसे चाहत का रंग लग गया इस मन के उजले बदन पर,
जब भी ख्यालों में आते हो जिन्दा होने एहसास तो देते हो।
कुछ भी न दे सकी तेरी अदा ए हुस्न और मोहब्बत ,
होठों को हसीं प्यास तो देती हो।
राहें न सही रौशनी का एहसास तो देते हो.....
लबों को प्यास तो देते हो।
रचयिता
प्रभात त्रिपाठी
(स अ) पू मा विद्यालय लगुनही गगहा,
गोरखपुर

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