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क़ौमी एकता

 क़ौमी एकता

कहीं है नफ़रत कहीं मोहब्बत , अजीब हालत ये आ गयी है,
न जाने कितनी मासूम लाशें , जगत को ताण्डव दिखा रहीं हैं,
हाँ मेरी महफिल में आ के देखो , ये हिन्दू कलमा सुना रही है ।।

धर्म की खातिर फ़ना हुए जो , मेरी भी पहचान अब बता दें,
कि एक ब्राह्मण लगा के टीका , अल्हम्दुलिल्लाह सुना रही है, 
हाँ मेरी महफ़िल में आ के देखो , ये हिन्दू कलमा सुना रही है ।।

नज़र मिला के नज़र भर देखो , हमारी नज़रे क्या गा रही हैं,
कि गीता हो या कुरान प्यारे , कभी न लड़ना सिखा रही हैं,
हाँ मेरी महफ़िल में आ के देखो , ये हिन्दू कलमा सुना रही है ।।

बस एक रब है उसी में सब है , यही तो कब से बता रही है,
कि एक ब्राह्मण लगा के टीका , अल्हम्दुलिल्लाह सुना रही है,
हाँ मेरी महफ़िल में आ के देखो , ये हिन्दू कलमा सुना रही है।।

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दीक्षा मिश्रा(स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय असनी द्वितीय
शि०क्षे०:-भिटौरा
जनपद:- फतेहपुर

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