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कुण्डलिया

कुण्डलिया

(विषय- कोरोना)

जगतपिता से प्रार्थना, करूँ आज करजोर।
तम कोरोना का मिटे, दिखे सुहानी भोर।।
दिखे सुहानी भोर, न ऐसी विपदा आवे।
कृपा करो करतार, महामारी मिट जावे।
त्राहि त्राहि कर लोग, हुए आकुल चिंता से।
करे पवन अरदास, विधाता-जगतपिता से।१।

कोरोना है मानता, बस ये ही अनुबंध।
सामाजिक दूरी रखो, घर को कर लो बन्द।
घर को कर लो बन्द, गर्म पानी ही पीना।
गांठ बांध लो बात, संयमित जीवन जीना।
कहे पवन कविराय, हाथ साबुन से धोना।
लापरवाही छोड़, मिटेगा तब कोरोना।२।

कोरोना के कोढ़ में, लगा ख़ाज का रोग।
भारत को छलने लगे, कुछ षडयंत्री लोग।।
कुछ षडयंत्री लोग, वायरस के जो वाहक।
मानवता पर आज, थूकते ये नालायक।।
किया संक्रमित देश, देश का हर इक कोना।
चिंतित है सरकार, मिटे कैसे कोरोना।३।

सारा जग बेहाल है, कोरोना विकराल।
कठिन समस्या बन गया, संकट का यह काल।।
संकट का यह काल, लीलता मानव जीवन।
त्रस्त सभी हैं आज, धनी हो या हो निर्धन।
लेकिन दृढ़ विश्वास, छँटेगा ये अँधियारा।
कोरोना से मुक्त, शीघ्र होगा जग सारा।४।
        
✍ 
डॉo पवन मिश्र
  कानपुर

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