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दहेज दानव

तर्ज- भोजपुरी लोकगीत

      दहेज दानव

बोह दिन दानव दहेजवा लाचार हो जाई,
जेह दिन देश के जवनवा तैयार हो जाई।।

तब - ना केहू के बिटिया जरिहे,
ना घर केहू के बिकाई-
बिटिया जनम तब भार न होइ हैं।
हर घर खुशी मनाई,
जब बेटा अउर बेटी समान हो जाई।
जेह दिन देश.............

हर बेटा तब बाप से कहिहैं,
हम दहेज ना लेबैं।
बाबा बहिनजी के बिआह में
केहू के दहेज ना देबैं।
अब दुलहिन दहेज से घर उजियार हो जाई।
जेह दिन..........…..

सासू ननदिया ना ताना मरिहे,
मिल के गले लगइहैं।
औरत औरत के हर दुःख बुझिहें,
सब खुशी से घर में रहिहें।
इहे सबसे "सुमन" क इजहार बा भाई,
जेह दिन देश.....…..

✍️
बृजबाला श्रीवास्तवा 'सुमन'
पद-स0अ0
विद्यालय-प्रा0 वि0 भीखमपुर
ब्लॉक-जहानागंज
जनपद-आजमगढ़

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