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नई आशा

नई आशा   
              
हमारी सोच में यह नफरतों का राग क्यों है ?
हमारे देश में यह मजहबी उन्माद क्यों है?
करुण क्रंदन सुनो उस मां का जो हम सब की मां है
उसे टुकड़ों में करने की फिर साजिश आज क्यों है?

हमारा धर्म हो सेवा हमारा कर्म हो सेवा,
अगर ईमान हो सेवा तो फिर बिखराव क्यों है?
बहुत आसान है यूं चंद टुकड़ों में बिखर जाना,
बहुत आसान है फिर से नया एक घर बना लेना,
मगर एहसास वह लाएंगे क्या जो साथ गुजरे हैं,
अगर हम एक हैं तो फिर बगावत आज क्यों है?

चलो मिलजुल के हम फिर से नया भारत बनाएंगे,
अहिंसा,प्रेम का फिर से नया पैगाम लाएंगे,
नहीं पीछे हटेंगे अब कभी संकल्प उसे अपने,
नई आशा नई उम्मीद का संचार लाएंगे।।         

✍️
आशा दूबे स.अ. 
पू.मा.वि.चौकड़ी
 क्षेत्र-गगहा,गोरखपुर

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