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गूंजे हरियाली के गीत

गूंजे हरियाली के गीत 🌿🌿
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प्रबल ताप देता दिनकर, 
अपनी किरणों से यह कह कर... 
यह समय नहीं शीतलता का... 
धारण कर अब उष्मा नभ का, 
धरनी के वक्षस्थल पर, 
वृक्षो, सागर, पर्वत तल पर, 
चमके बनकर ज्वाल प्रखर, 
जीवन के हर कण-कण में 
भर दे ज्वाला की ज्योति प्रबल !
तप्त हृदय की शीतलता बन, 
हर्षित, विलसित, मादकता बन, 
जीवन संचय का बन संगीत 
छेड़ो अब मादक प्रिय तान, 
आओ अब संगीत सुनाओ, 
व्योम अम्बु के अब छा जाओ, 
बरसो बनकर तुम मनमीत, 
गूंजे हरियाली के गीत !
गूंजे हरियाली के गीत !!

✍️
नीरजा बसंती (स. अ.)
प्रा. वि. -गहना 
ब्लॉक -खजनी 
जनपद -गोरखपुर

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