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बालगीत

बालगीत : छोटी छोटी बिलैया रे

छोटी छोटी बिलैया रे,
घूमें घर अंगनईया रे।
दृष्टि के घर में दूध पीने आये,
सृष्टि डंडा लेकर दौड़ाये।
भागे झम झम झैया रे,
घूमें घर अंगनईया रे।

छोटी छोटी बिलैया रे,
घूमें घर अंगनईया रे।
काली बिल्ली मोटी बिल्ली और पतली,
दरवाजा खुला तब दूध पीकर निकली।
मम्मी बोले हाय दैया रे,
घूमें घर अंगनईया रे।

✍️रचयिता 
दीपक कुमार यादव (स•अ•)
प्रा वि मासाडीह महसी
बहराइच
मोबाइल 
9956521700

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