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"मै नारी हूं"

"मै नारी हूं"

गुरुर है मुझे कि मैं नारी हूं,
ईश्वर की अद्भुत कलाकारी हूं,

स्वाभिमान को जिसके पुरुष ना काट पाए,
ऐसी तीखी कटारी हूं।

मां, बहन, पत्नी हूँ पर नहीं बेचारी हूं.
गुणों में पुरुष पर भारी हूं
गुरुर है मुझे कि मैं नारी हूं.

चाहती हूं स्वाभिमान से जीना.
नहीं ज़हर के आँसू पीना.
अपने विचारों की सवारी हूं.
पुरुष की जननी हूं
दुनिया की दुत्कारी हूं.
गुरुर है मुझे कि मैं नारी हूं.

क्रोध में ज्वाला बनने वाली जगदंबा काली हूं,
सृष्टि के ऊपवन का माली हूँ.
सुख भोग के जिसको छोड़ा पुरुष ने
वैसी परित्यक्ता बेचारी हूँ.

गुरूर है मुझे कि मैं नारी हूं,
 ईश्वर की अद्भुत कलाकारी हूं।


✍️
नम्रता श्रीवास्तव (प्रoअo)
जनपद-बाँदा

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