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उस रोज दिवाली होती है

दिल वाली जब होती है,
उस रोज दिवाली होती है।
जब तन मन में रंगोली हो
उस रोज दिवाली होती है।

आँखों में ख़ुशी अपार दिखे
उस रोज दिवाली होती है।
जब यार मिले परिवार मिले
उस रोज दिवाली होती है।

जब तन्हा दिल गुलजार मिले
उस रोज दिवाली होती है।
साँसों में खुशबू सार मिले
उस रोज दिवाली होती है।

दीये जले जब खुशियों के
प्रेम स्नेह संसार मिले,
उस रोज दिवाली होती है।
टूटे ख्वाब भी सज जाये
रोशन एक संसार मिले
उस रोज दिवाली होती है।

जब खून पसीने से डूबे
मजदूर को भी अरमान मिले
उसको भी मीठी शाम मिले
एक नई चमक अंजान मिले।
उस रोज दिवाली होती है।

अनजाने रिश्तों को एक नया आयाम मिले,
बूढी माता संभल उठे ऐसा एक परिवार मिले,
उस रोज दिवाली होती है।
"निशा" अमावस हो लेकिन,
जीवन में नया "प्रभात" मिले।
उस रोज दिवाली होती है।

रचयिता
प्रभात त्रिपाठी गोरखपुरी 
(स0 अ0) पू मा विद्यालय लगुनही गगहा,
गोरखपुर 
(9795524218)

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