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स्वच्छता का वरदान

हम बच्चों की सुन लो विनती
ओ मेरे भगवान
उनको भी सद्बुद्धि दे दो
हमको भी सद्ज्ञान।।
फैला रहे हैं हर ओर गंदगी
किसको यहाँ समझायें?
करते हैं ये शौच खुले में
इनको शरम न आये।।
हम ठहरे नादान, ओ मेरे भगवान,
हम बच्चों की........ (१)

गाँव शहर की सड़ती नालियाँ
बदबू खूब फैलाये।
देख गंदगी रोगों के दल
अपनी घात लगायें।
नाक दबाये निकले जान, ओ मेरे भगवान।
हम बच्चों की......... (२)

मृद वायु जल हुए प्रदूषित
डी.जे. खूब बजायें।
बन गये बहरे हार्ट अटैक के झटके सह नही पायें।
गयी मुफ्त में जान ओ मेरे भगवान।
हम बच्चों की......... (३)

कट रहे हैं वृक्ष अभागे,
पुरखों ने जो लगाये।
बदल रही जलवायु धरा की
बाढ़ अकाल आये।।
तेरी लीला महान ओ मेरे भगवान
हम बच्चों की ......... (४)

जीवन रक्षक छतरी निशदिन
जर्जर होती जाये।
पराबैगनी किरणों से फिर
जग को कौन बचाये?
कैसे, इसका हो निदान, ओ मेरे भगवान
हम बच्चों की.........(5)

नाश तेरा हो जाये प्रदूषण
सर्वत्र कहर बरपाए।
आज विकास के पथ पर मानव
अंधी दौड़ लगाये।।
'अनाड़ी' बना इंसान, ओ मेरे भगवान
हम बच्चों की.......(6)

रचयिता
ठाकुर प्रसाद विश्वकर्मा 'अनाड़ी'
प्राथमिक विद्यालय पट्टी
वि०क्षेत्र - शाहगंज
जनपद- जौनपुर

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