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लाउडस्पीकर का धर्म

मैं लाउडस्पीकर हूँ।

मैं बजने से ज़्यादा बजाता हूँ।
रसपान नहीं कराता, इंजेक्शन लगाता हूँ।

मैं सुनाता नहीं, चिल्लाता हूँ।
बात कहता नहीं, थोपता हूँ।

मेरे साथ धर्म न सही, धर्म का मुखौटा तो है..........
आज की तारीख में मैं ही धर्म के मुखौटे का सर्वश्रेष्ठ मेकअप हूँ।
धर्म के ठेकेदारों की दुकानदारी का सेटअप हूँ।

बड़े-बड़े जुलूसों में खुल्लमखुल्ला मेरी दबंगई चलती है।
साथ चल रहे व्यक्ति को पड़ोसी की बात सुनाई नहीं पड़ती है।

मेरे रहते किसकी कुव्वत है जो प्रभात की शांत बेला में पक्षियों का मधुर कलरव सुन पाये?
मेरे रहते कौन शूरवीर है जो निजी पूजा-आराधना में ध्यान लगा पाये?

कानों में कितनी ही रुई ठूंस ले, विद्यार्थी को ध्यान से पढ़ने नहीं दूंगा।
बीमार भले ख़त्म हो जाये, बीमारी ख़त्म होने नहीं दूंगा।

मैं हिन्दू नहीं, मुसलमान नहीं,
मेरा धर्म है सताना।
तुम्हारे धर्म की आड़ में, तुमको ही लड़ाकर
अपना धर्म निभाना। 

रचनाकार
प्रशांत अग्रवाल
सहायक अध्यापक
प्राथमिक विद्यालय डहिया
विकास क्षेत्र फतेहगंज पश्चिमी
जिला बरेली (उ.प्र.)

1 comment:

  1. आज के परिदृश्य में ईश्वर भक्ति के आड़ में उन्माद को बढ़ावा देने वाले लोगों पर सटीक प्रहार।

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