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बहन बिना घर सूना

बहन बिना घर सूना है
बहन बिना घर सूना है
ये घर आंगन का गहना है
बहन बिना घर सूना

जिनके घर मे भाई होते दो चार
बहन नही होती है
भैया की कलाई राखी बिन
देखो कितनी सूनी होती है
चिडिया सी चूं चूं करती बहना
कोयल सी कूं कूं करती बहना
इनसे महकता है
घर आंगन का कोना कोना


ये ईश्वर का वरदान होती है
खुशनसीब होते हैं भाई
जिनके बहनें दो चार होती हैं
भाई बहन मिलकर रहना है
बहन बिना घर सूना है

प्यारी बहना आओ न
हाथ मे राखी बांधो न
ये बंधन है प्यार का
भाई बहन के प्यार का
भाई बहन की रक्षा का
अनमोल रिश्ते के त्योहार का
जीवन भर साथ निभाना है
बहन बिना घर सूना

बहन पराये घर जा बसी
भाई आश का दीप जलाता है
साल भर के बाद जब
राखी का त्योहार आता है
रंग बिरंगी राखी लेकर
घर आती बहना

मेरे भैया को कोई कष्ट न मिले
यही दुआ मनाती बहना
बहुत प्यारा पवित्र बन्धन
सारे जग को बंधना है
बहन बिना घर सूना है
बहन बिना घर सूना है


रचनाकार
सारिका तिवारी, प्र0अ0,
उ0प्रा0वि0 फुलवामऊ,
वि0क्षे0 बहुआ,
जनपद फतेहपुर।

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