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नर पाएगा जीवन में जय

जीवन पर कोरोनो का साया है । चहुँओर हाहाकारी मंजर है । विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिसर्च मन को थर्रा रहीं हैं। देश में कोरोनो की दूसरी बड़ी लहर का तांडव जारी है और मीडिया में तीसरी लहर की चर्चा है । गाँव से शहर तक असामयिक मौतों का सिलसिला जारी है । सभी बदहवास और बेबस हैं । आत्मविश्वास ही एकमात्र पूंजी है जो इस हालात में किसी का सम्बल बन सकती है । 


 नर पाएगा जीवन में जय  
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चहुँओर कोरोना ,
फैला अनंत ,
पूछ रहे सब ,
दिग - दिगंत, 
आया जीवन का 
 कैसा करुण अंत । 


श्रद्धाज॔लियों के निमित्त ,
पुष्प ले आया वसंत  , 
ये कौन समझाए उसे हंत ,
श्मशान न जा सकता वसंत, 
कातर मानव सभीत ,
देख मृत्यु के विषदंत ।


मौन है ईश्वर -------
बंद मंदिर के कपाट ,
नृत्य करती भैरवी, 
ले रक्तरंजित ललाट , 
संवेदनाएं खो चुके ,
दीखते चेहरे सपाट ।  


अरमान डूबते हैं दिल में ,
दिनमान डूबता है दिन में ,
अंधकार आ बैठा है ,
जन - जन के मन में , 
ये देख मानव विनाश ,
है रूह काँपती तन में । 


ढूँढे दवा नहीं मिलती ,
साँझ अंधेरों में ढलती ,
घिरा तिमिर जीवन में ,
संघर्ष करो क्षण क्षण में,
करो यत्न  होकर निर्भय , 
नर पाएगा जीवन में जय  ।   

प्रदीप तेवतिया 
एआरपी-- हिंदी   
सिम्भावली (हापुड़ )

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