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गजल

अपना बेगाना ग़म सहता रहता है,
दिल दुनिया की बातें कहता रहता है|

उम्मीदों के साये में कितने किस्से,
हरदम मन बंजारा बुनता रहता है|

सच्ची झूठी बातों से बहलाता मन,
दिल के कोने में इक बच्चा रहता है|

कुछ कह जाती कानों में पुरवाई,
दिन सारा गीतों में ढलता रहता है|

सर्दी गर्मी का मौसम या बरसातें,
कहने  को हर मौसम अच्छा रहता है|

✍   लेखिका :
निरुपमा मिश्रा
शिक्षिका
जनपद : बाराबंकी

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