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मुनिया की खुशी

आज मुनिया बहुत खुश है। मास्टरजी ने सुबह बुलावे की घंटी बजाई । वह स्कूल में सबसे पहले पहुंच कर फर्स्ट आना चाहती है। उसके आगे उसका पालतू  कुत्ता कल्लू और छोटा भाई मुन्नू भी दौड़ रहा है। वह अपने भाई से
जीतना नहीं चाहती, क्योंकि वह उससे छोटा है और मां ने भी कहा है कि भाई को किसी से हारने मत देना।फिर वह क्यों उसे हराये? उसे स्कूल में जाना बहुत अच्छा लगता है। उसे अपने साथ के बच्चों के साथ पढ़ना, खेलना और साथ में भोजन करना भी बहुत भाता है। स्कूल की छुट्टी के समय होने वाली संध्या गायन में वह मानिटर है। इसलिये वह इसका बेसब्री से इंतजार करती है। पर यह सब हमेशा से ऐसा नहीं था।
वह जब स्कूल मे दाखिले के लिए पहली बार आईं तो मैमजी ने जिस तरह से उसे घूरा, वह सहम सी गई। उनके पास रखा डंडा ...। मैमजी ने बाबू से कहा कि अगले दिन से इसे खाने के लिए एक प्लेट देकर भेजना।
अगले दिन अम्मा ने जगाया, मुनिया स्कूल नहीं जाना? मैं खाट से उठी। अपना हाथ, मुंह धोकर तैयार हो ही रही थी कि बटेसर आ गया। वह भी गांव वाले प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। मां ने एक रोटी पर नमक व तेल चुपड़ कर दी, मैंने झट से खा ली। अभी आंगन से देहरी तक पहुंच भी नहीं पाई थी कि अम्मा ने कहा मुन्नू को भी लेती जा, हम और तेरे बाबू काम पर जायेंगे। अपना और मुन्नू का ढंग से ख्याल रखना।
बड़े उमंगित मन से स्कूल पहुंचे। स्कूल में कुछ बच्चे खेल रहे थे, कुछ बच्चे लडाई भी कर रहे थे। मैंने बटेसर से पूछा कि हम लोग बहुत जल्दी आ गये हैं क्या ? मैमजी कहां है ? बटेसर ने कहा, चलो हम भी खेलें ।मैम जी  हापुड़ से आती हैं, टाइम लगता है।
थोड़ी देर में मैम जी आ गई। उसके बाद गांव वाले मास्साब भी आ गए। हम और बटेसर एक ही कमरे में चटाई पर बैठ गये। मास्साब ने सबको ककहरा लिखने को कहा । दूसरे कमरे में मैम जी रजिस्टरों में कुछ कर रहीं थी। मुझे तो कुछ आता नहीं था, मैं क्या लिखूँ? मैंने मास्साब से कहा कि मैं क्या लिखूँ , तो उन्होंने कहा गोली बनाओ और रोज स्कूल आती रहो, एक दो साल मे लिखने-पढ़ने लगोगी। थोड़ी देर में मुन्नू रोने लगा। उसे प्यास लगी थी। मैम जी के कमरे के सामने ही हैण्डपम्प लगा था । बटेसर और मुझे भी प्यास लगी थी । मास्साब से पूछकर हम लोग पानी पीने चले गये । मैमजी सेब काट रहीं थीऔर सरला चाची को पांच आलू और एक टमाटर देकर तहरी बनाने को कह रहीं थी। उन्होंने मुझसे पूछा कि वह मुन्नू को क्यों लाई हैं? मैंने बताया कि मां और बाबू काम पर जाते हैं इसलिए। फिर क्या था मुझे बुरी तरह डांट पड़ी।
थोड़ी देर बाद सरला चाची ने आवाज दी कि खाना बन गया है।सभी थाली को चम्मच/गिलास से पीटते हुए ,भगौने के पास इकट्ठा हो गये। इन दुर्व्यवस्थाओं के बीच बटेसर के सहयोग से मुझे भी दो करछी तहरी मिल ही गयी।               
खाना खाने के बाद फिर सभी खेल में मस्त हो गये। मैं और मुन्नू वहीं चबूतरे पर बैठ कर सबका खेल देखने लगे।  तभी मिथुन और आशीष में लड़ाई हो गयी। यह  पंचायत मैमजी के पास गई।  मैमजी ने बिना समझे दो डंडा मिथुन को जड़ दिया। फिर तो जैसे आफ़त हो गई। मिथुन छोटे-बडे़ कंकड़ मैमजी के ऊपर फेंकने लगा। मैमजी भाग कर अपने को कमरे में कैद कर लिया। तभी मास्साब भी खाना खाकर आ गए, वे मिथुन को बहुत पीटे। मामला शांत होने पर बहुत भारी मन से मैमजी हापुड़ चली गई। मैं सोच रही थी कि ऐसे स्कूल में आने से तो अच्छा घर ही पड़े रहेंगे।
        यह प्रकृति का नियम है कि कोई चीज स्थिर नहीं है, उसमें परिवर्तन होता रहता है। हर अंधेरी निशा के बाद आदित्य मुस्कुराते हैं। आशा की किरण जलती है, मेरे स्कूल में एक मास्टरजी आते है।
एक दिन हम लोग स्कूल पहुंचे ,तो देखा कि गांव वाले मास्साब, मैमजी के साथ कोई एक आदमी भी बैठा था। हम लोग धीरे से कमरे में जाकर बैठ गये। बटेसर ने पता लगाकर बताया कि नया आदमी, इस स्कूल के हेडमास्टर हैं। थोड़ी देर में हम लोगों के कमरे में हेडमास्टर जी आये। सब बच्चों से बारी-बारी से नाम पूछा। एक चूहों वाला खेल कराया।खेल में इतना मजा आया कि सब बच्चे लोट-पोट हो गए।मैं पहली बार इस स्कूल में इतना हंसी थी। वे सभी बच्चों से मुस्कुरा कर तरह-तरह की बातें बताये।
सुबह पहर स्कूल के तरफ से लम्बी घंटी की आवाज सुनाई दी। गजोधर काका ने बताया कि नये वाले मास्टर जी आ गये हैं वहीं घंटी बजा रहे है। जब हमलोग स्कूल पहुंचे तो कुछ -कुछ बदला-सा दिखाई दिया।  सभी बच्चे लाइन में हाथ जोड़ कर खडे़ होकर कुछ गा रहे। जल्दी से बटेसर और मैं  एक लाइन में खडे़   हो गये। पहले गांव वाले मास्साब गाते फिर पीछे से सभी बच्चे। नये वाले मास्टरजी ने पीटी के बारे में बताया फिर कराया। आज सभी अलग-अलग कमरे मे बैठे।पूरा स्कूल व कमरे को रामू काका से कहकर मास्टरजी ने साफ करवाया था। मैमजी भी जल्दी ही आ गयीं थी। सभी आज केवल पढाई में मशगूल थे।
आज सरला चाची ने आवाज देकर नहीं बुलाया। बरामदे में सभी बच्चे अपने धुले हुए प्लेट लेकर बैठ गए। सरला चाची ने सबके थाली मे सब्जी और रोटी परसा। आज खाने मे कोई लड़ाई नहीं हुई। हैण्डपम्प पर गांव वाले मास्साब ने लाइन लगवाकर पानी पीने दिया। कक्षाएं फिर शुरू हो गयीं। आज ककहरा, गिनती, पहाडों के अलावा ए,बी,सी,डी  भी पढ़ाई गयीं। नये वाले मास्टर जी जो मिथुन लोग को पढ़ा रहे थे। हम लोग की कक्षा में आये। उन्होंने चूहों वाला खेल करवाया।
आज पढऩे मे मजा आ गया। शाम को छुट्टी के समय फिर लाइन लगी। नये मास्टर जी ने सबको समय से स्कूल आने, साफ कपड़े पहनने, नहाकर आने और अम्मा बाबू को नमस्ते करके आने को कहा।  सभी बच्चों से पूछा कि बडे़ होकर क्या बनोगे। बटेसर ने कहा फौजी तो मुनिया भी जल्दी से पुलुस बनने को बता दिया।
अब मुनिया कक्षा-चार में पढ़ने लगी है। मास्टर जी ने बाल संसद का गठन करअलग-अलग विभाग बना दिया है। मुनिया को संध्या सभा का मानिटर बना दिया है। आज बाबू , मुन्नू को दाखिले के लिए स्कूल लाए। मास्टर जी ने मुन्नू के माथे पर हाथ फिराया,नाम पूछा एक कच्चा आम(टाफी) दिया। मुनिया की आँखों में गंगा-यमुना की धाराएं उमड़ने लगी।

लेखक
विद्या सागर(प्र०अ०)

प्राथमिक विद्यालय गुगौली,
विकास क्षेत्र - मलवाँ,
जनपद - फतेहपुर।

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