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एक वक़्त आता है...!

एक वक़्त आता है,
जब अंदर ही अंदर सब चुप हो जाता है..

न कोई रूह बोलती है,
न तब दिल गुनगुनाता है,
चुप हो जाती है ज़मी,
आकाश खामोश हो जाता है,
एक वक़्त आता है,
जब अंदर ही अंदर सब चुप हो जाता है..

न कोई राह हँसती है,
न तब वक़्त मुस्कुराता है,
चुप हो जाती है घड़ी,
इंतज़ार खामोश हो जाता है,
एक वक़्त आता है,
जब अंदर ही अंदर सब चुप हो जाता है..

तब आँखे दूर नज़र जमाये दरअसल कुछ नहीं देखती,
ये वो दौर होता है जब किसी के होने न होने का,
फर्क नही पड़ता पर असर दिख जाता है..
जब ख्याल दूर तलक जाए पर कुछ भी नहीं सोचती,
ये वो दौर होता है जब किसी के होने न होने का,
अर्थ नही होता है पर असर दिख जाता है..
नस्ले आदम ही हैं सब, देवता कोई नही,
सबकी ज़िन्दगी में बुरा अच्छा सा ही सही..
एक वक़्त आता है,
जब अंदर ही अंदर सब चुप हो जाता है..

रचयिता
यशोदेव राय देবয়शो
(स0अ0 पूर्व माध्यमिक विद्यालय नाउरदेउर)
कौड़ीराम, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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