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नेपोलियन

मई 26, 2025
नेपोलियन ------------- हाँ, हाँ, वही — वही नेपोलियन, गली के कोने पर कूड़े के ढेर से बने पिरामिड को अपना साम्राज्य समझने वाला, और खुद को उसका...Read More

वक़्त चाहिए सपनों को आकार देने में

मई 06, 2025
वक़्त चाहिए सपनों को आकार देने में हर महान निर्माण की शुरुआत एक छोटे, अनदेखे प्रयास से होती है। जो हाथ से फिसला, वही सबक बनकर वापसी की राह द...Read More

हर रोज़ दो चेहरों में ढलता है आदमी

मई 04, 2025
यह ग़ज़ल उस मध्यमवर्गीय मानसिकता का आईना है, जो दो छोरों के बीच झूलती रहती है — एक ओर अहंकार, दूसरी ओर दीनता। समाज में जीने की मजबूरी उसे बा...Read More

पूर्वाग्रह

अप्रैल 17, 2025
पूर्वाग्रह पूर्वाग्रह से ग्रस्त , साहब आए ,धड़धड़ाते ..... गाड़ी रुकी, सुगबुगाहट हुई ,अधिकारी  आए .... परिचय नहीं बताए , नाराज कि,पहचाने नही...Read More

"शिक्षा बने हनुमानी मशाल"

अप्रैल 12, 2025
जब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित हो जाए, तो वह विचार नहीं देती—सिर्फ सूचनाएँ देती है। मगर जब शिक्षक स्वयं प्रेरणा बन जाएँ, तब कक्षा बन जाती ...Read More

“राम के रस्ते पर आज कौन चले?”

अप्रैल 07, 2025
“राम के रस्ते पर आज कौन चले?” (जब आदर्शों को भोग के बाजार में नीलाम किया जा रहा हो,  जब धर्म का अर्थ सुविधा बन जाए, और कर्तव्य बोझ—  तब “राम...Read More

फूल्स डे (Fool's Day’) : असल मायने में पूरे देश का सामाजिक पर्व

अप्रैल 01, 2025
हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला ‘Fool's Day’ (अप्रैल फूल) भले ही एक हल्के-फुल्के मजाक का दिन माना जाता हो, लेकिन अगर गौर करें, तो यह ...Read More