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नारी वन्दन

चीखती, चीत्कारती,
अपने दुखों से हारती,
दानवों को पछाड़ती,
ख़ुद को ख़ुद ही संभालती,
करुणा में सिसकारती,
वीरांगना बनकर दहाड़ती,
फिर भी सबको दुलारती,
तनमन सब कुछ वारती,
जीवन सबका सँवारती,
प्रेम से पुचकारती,
निश्चित ही नारी स्वरूप की,
उतारना चाहिए आरती।।
आमिर फ़ारूक़,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद माफ़ी,
विकास क्षेत्र सालारपुर,
जनपद बदायूँ


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