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होली का सन्देश

होली के परिदृश्य में झूमे सारा देश,
रंगों का त्यौहार है देता यह सन्देश।

भिन्न भिन्न भाषाएँ है भिन्न भिन्न है वेश।
सबका अपना अपना, अलग अलग आवेश।

पर रंग लगने के बाद जो, छाती घटा निराली,
रंग में डूब के देखो तुम, रंगों की हरियाली।


खुश है आज बच्चा-बच्चा, मस्ती की है बहाली,
चारों तरफ बिखर रही है, खुशियों की खुशहाली।

रंग न जाने हिन्दू मुस्लिम, न जाने परदेस,
रंग-बिरंगी खुशियां बाटे, और बांटे सन्देश।

सात रंग से मिलकर जैसे बनता, प्यारा धनुष कमान( इंद्रधनुष),
भारतवासी मिलकर ऐसे ही, संजोये अपना हिंदुस्तान।

रंगों भरी इस होली पर, शब्दों की यह माला,
पिरो-पिरो कर मैंने इनको, एक लड़ी में डाला।

रचयिता
मयंक गुप्ता
प्रधानाध्यपक
प्राथमिक विद्यालय बनगवां
वि ख- सालारपुर, बदायूं।

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