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जिन्दगी का है सफर

ना ठहर तू इस पहर ।
लहर है ये डगर डगर ।
हारना और जीतना ।
जिन्दगी  का है  सफर।।

हर दिन एक नया सवाल
हो रहा तैयार है
हर सवाल का जवाब
ढूंढ ले तू मगर।
रहे इस बात की खबर ।

ना ठहर तू इस पहर ।
लहर है ये डगर डगर ।
हारना और जीतना ।
जिन्दगी का है सफर ।।

क्या हुआ जो ये क्षण ।
तेरे लिये प्रतिकूल है ।
हर कोई इस जिन्दगी में ।।
होता रूबरू इसी से है ।।
हर पग में तू विस्वास भर ।
हौसले का आगाज़ कर ।
रहे पर ये खबर ।

ना ठहर तू इस पहर ।
लहर है ये डगर डगर ।
हारना और जीतना ।
जिन्दगी का है सफर ।।

भागदौड़ भरे इस जीवन में ।
प्रयास  ही एक  विकल्प है।
इस विकल्प पर चलने की ।
जिद तू कर ले मगर ।
रहे इस बात की खबर ।

ना ठहर तू इस पहर ।
लहर है ये डगर डगर ।
हारना और जीतना ।
जिन्दगी का है सफर ।।






रचनाकार
प्रमोद कुमार, सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय धावनी हसनपुर,
वि0क्षे0-बिलासपुर,
जनपद-रामपुर।
 

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