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प्राथमिक विद्यालय की दिनचर्या

आओ कर ले हम परिचर्चा
अपने प्राथमिक विद्यालय की !
उलट-पुलट हुई है व्यवस्था
बात यही समझाने की...!
       चाह रहे है कब से पढ़ना
       और पढ़ाना बच्चों को
       उलझ गये हैं सुबह से ही
       लिस्ट में तेल - मसालों के
       सोचा था सिद्धान्तों की
       बातें कुछ बतायेंगे
       आकर विद्यालय में शिक्षा के
       कुछ पाठ को समझायेंगे।
       पाठ तो खोल न पाये
       पहले आ गया, आज का मीनू
       है आज क्या बनवाना
       गरूजी इस पर ध्यान लगाना
       रसोइया मांगे चावल-दाल
       गरूजी का हाल - बेहाल
उसके बाद एम डी एम रजिस्टर आया
बच्चों ने कितना खाना खाया...
इसको भरकर ध्यान लगाया
बच्चों को है पाठ पढ़ाना ,
मुड़ गये गरूजी ,कक्षा की ओर
जहाँ मचा था ,बच्चों  का शोर
सोचा इनको क्या आज पढ़ाये
नकल एक पेज का दे आये
आकर बैठे दरवाजे के पास
सोच रहे है बैठे- बैठे
विद्यालय में करवाने है
अभी बहुत से काम !
दीवारे , फर्श और शौचालय
मरम्मत को ,देख रहे हैं बाट..
भय हैं आला अधिकारी का
कर ले न निरीक्षण आज
आने से पहले ही उनके
करवा लू पूरा विद्यालय ही साफ ..!
फ़ोन घुमाया सोचकर
सफाई संचालक के पास
आ जाओ विद्यालये  भाई !
कर दो थोड़ी साफ- सफाई
रौब जमाकर बोल उठा
नही कर सकता , आज बहुत है काम
अगले हफ्ते आऊँगा ,
फिर करवाना काम ।
इतने में ही गाँव के मुखिया
का हो गया आगमन
गुर्राये वो देख के
विद्यालय का आँगन
गरूजी!! करवा लो सफाई
नियमित हो कक्षा में पढ़ाई
राशन - पानी का दो हिसाब
कितने पैसे शिक्षा निधि में आये
सारी व्यवस्था ठीक चाहिए
   करता हूँ आगाह !!!
पहुँच जायेगी शिकायत
कार्यालय में तत्काल !!!
        गरूजी हैरान खड़े है
        बहुत असमंजस में पड़े है!
        क्या कहे , समझाये किसको
        अपनी व्यथा को आज ...
उलट- पुलट हुई है व्यवस्था
फिर विद्यालय की आज !!
यही सोचते चल पड़े हैं
फिर कक्षा की ओर
जहाँ मचा था बच्चों का
अति भयानक शोर
हाथ में डंडा लेकर दौड़े ....
शान्त कराने शोर !
सुन कर बच्चों की व्यथा -कथा
शान्त कराया शोर ।
तभी बज उठी , घंटी खाने की
दौड़ पड़ी बच्चों की फौज
पीछे- पीछे दौड़े गरूजी
रसोई की ओर
डांट लगाई , कतार बनवायी
बैठा दिया सबको एक ओर
खिला- पिला भेजा बच्चों को
फिर कक्षा की ओर ..
खुद भी हौले-हौले
चल पड़े कक्षा की ओर
जहाँ मचा हुआ था फिर से
बच्चों का भयानक शोर
सर चकराया!!
विद्यालय की व्यवस्था को देख
बैठ गये फिर कुर्सी पर
कक्षा के अन्दर
बच्चों को लगे ,बातें कुछ समझाने
तभी फ़ोन पर उनके
लगा एम डी एम की सूचना आने
संख्या बटन दबा कर
ली चैन की सांस ।
चलो विद्यालय की सुचना का
काम हुआ अब पूरा ।
विद्यालय को बंद करने का
समय भी हो गया पूरा
         कल करना होगा, जो था
         बाक़ी पाठ अधूरा.....
         बंद करवाया सब कमरो को
         चल दिये बैग उठाकर ।
सोच रहे थे चलते- चलते
कल प्रातः फिर आना है
अपने इस विद्यालय का संचालन
स्वयं अकेले उठाना हैं ।
उलट- पुलट जो हुई है व्यवस्था
उसको सुलझाना हैं ।

रचयिता
दीप्ति राय, स0 अ0
प्राथमिक विद्यालय रायगंज
खोराबार, गोरखपुर
  खोराबार गोरखपुर

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