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ग़ज़ल: रूढ़ियों की केंचुल उतार फेंक

सितंबर 10, 2024
ग़ज़ल: रूढ़ियों की केंचुल उतार फेंक रूढ़ियों की केंचुल उतार फेंक,   इक नई सुबह की तू पुकार फेंक।   झूठ के नक़ाबों को आज तोड़ दे,   ख़ुद से म...Read More

पश्चाताप

सितंबर 05, 2024
पश्चाताप ! पेड़ की वो मोटी जड़, निर्निमेष निहारती रहती है  फलों को, आकर्षक रंग, सुंदर स्वरूप, मिठास बांटने की कला, हर्षित होती है, अपने पोषण...Read More

वतन मेरा

अगस्त 15, 2024
वतन मेरा हर रंग में हर भेष में  सबसे प्यारा वतन मेरा। बोली संस्कृति मर्यादा में  सबसे आगे वतन मेरा। स्नेह और शालीनता में  वृहद स्वरूप वतन मे...Read More

आया सावन

जुलाई 23, 2024
आया सावन आया सावन महादेव का सावन मन को मन भाया  सावन चारो ओर हरियाली छाई  प्रकृति ने क्या छबि है पाई जीवन हो गया हरा -हरा सा हरियाली से हरा ...Read More

बेटियों का घर

जुलाई 18, 2024
बेटियों का घर कहाँ  ह्रदय के अंतर्मन मे ये प्रश्नकौधता है अक्सर हम बेटियों का घर कहाँ है घर कहाँ बेटी जब पैदा हुई  माँ बाप की आँखे खिली नन्ह...Read More