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चुन्नू की पंचायत

मैं अपने प्राथमिक विद्यालय-गुगौली, मे कक्षा-5 के बच्चों को पाठ-पंचपरमेश्वर पढ़ा रहा था कि संकुल प्रभारी का फोन आया । बच्चों के लिए जूते का विवरण दे जाइए। मैं विचारों मे खोने लगा, इसी जूते ने 14 वर्ष शासन किया।इसी जूते को बतौर हथियार माननीय लोग विधानमण्डल मे बिना लोक लाज के प्रयोग भी करते हैं।
बच्चे विद्यालय मे अधिकांश नंगे पैर आते हैं और पैर चटाई के पीछे पोंछकर बैठ जाते हैं। कुछ चप्पलें पहनकर आते हैं, कक्षा में किनारे फेंककर बैठ जाते हैं।
जब कभी आपस मे लड़ाई करते हैं तो बातों-हाथों से करते हैं। अब लड़ाई की स्थिति मे यह जूता परमाणु अस्त्र का काम करेगा।
पंचपरमेश्वर मे अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में पंचायतगांव में ही हो जाती है। परन्तु  चुन्नू और मुन्नू की पंचायत कहाँ होगी? एक दिन दोनों एक ही जूते के लिए लड़ पड़े। दोनों के जूते बालि और सुग्रीव जैसे, एक ही रंग एक ही नंबर। शिक्षक भी भ्रमित अब क्या करें। यह लड़ाई घर तक जायेगी और जूतों के साथ चुन्नू और मुन्नु की अम्मा स्कूल और थाना एक कर देंगी। थानेदार, प्र०अ० को जूता पंजिका के साथ थाने बुला-बुलाकर उनका भी जूता घिसा देगा।
हमारा सरकार से आग्रह है कि अगर उनका मन साफ है तो बच्चों को जूता के बदले शिक्षापयोगी वस्तुएं-कापी, पेन,पेन्सिल आदि प्रदान करें। विद्यालयों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराएं। तभी इस देश के लिए शिक्षक अच्छे नागरिकों का निर्माण कर पायेंगे।

रचयिता
विद्या सागर(प्र०अ०)
प्राथमिक विद्यालय गुगौली,
विकास क्षेत्र - मलवाँ,
जनपद - फतेहपुर।

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