चैत्र नव वर्ष
चैत्र नव वर्ष
सृष्टि के आरम्भ का दिन,
जगत में अति हर्ष है।
झूम कर बोलो सभी से,
आगया नव वर्ष है।।१।।
हर्ष है बागों में कोयल,
मधुर स्वर में गा रही है।
काग से कुछ कह रही,
पर पवन से शर्मा रही है।
भा रही यह छवि सभी को,
छवि सभी को भा रही है।
शुभ समय अब आ गया,
संदेश शायद ला रही है।
सृष्टि के आरम्भ का दिन,
जगत में अति हर्ष है।
झूम कर बोलो सभी से,
आगया नव वर्ष है।।२।।
हर्ष है मधुमास का,
पावन महिना आ गया है।
पेड़ के डालों पे सुंदर ,
सा नगीना छा गया है।
आ गया है बौर आमों,
की सुघर से डाल पर।
राजता है ज्यों तिलक,
शिशुओं के सुंदर भाल पर।।
सृष्टि के आरम्भ का दिन,
जगत में अति हर्ष है।
झूम कर बोलो सभी से,
आगया नव वर्ष है।।३।।
हर्ष है ठंडक विदाई,
छोड़ते कम्बल रजाई।
विटप दल यों झर रहे हैं,
अश्रु की ज्यों बाढ़ आयी।
ताप का पैगाम लेकर,
ग्रीष्म ऋतु धीरे से आई।
आ गयी सूरज किरण की,
लालिमा नभ में है छाई।
सृष्टि के आरम्भ का दिन,
जगत में अति हर्ष है।
झूम कर बोलो सभी से,
आगया नव वर्ष है।।४।।
हर्ष है अब अंग-अंग,
अनंग राग समा गया है।
पुष्प कलियों के चमन में,
सुगंध मादक छा गया है।
भा गया है सर्षपों का,
पीत चादर ओढ़ आना।
और कलरव पंक्षियों का,
फ़ाग का धुन गुनगुनाना।
सृष्टि के आरम्भ का दिन,
जगत में अति हर्ष है।
झूम कर बोलो सभी से,
आगया नव वर्ष है।।५।।
✍️
रमेश तिवारी(स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय हरमन्दिर खुर्द
क्षेत्र-फरेन्दा,महराजगंज उत्तर-प्रदेश
📳-९८३९२५३८३३
वाह वाह बहुत सुन्दर सृजन।नवर्ष की पावन बेला पर ।।
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