होली
होली
झूम झकोर झांझ चहुं बाजत ,
भई उन्मत्त बयार फागु की ।
कोमल किसलय ,कुसुमित पल्लव ,
आम्र मंजरी सुरभित दिग - दिग ।
ओढ़े पीत ओढ़नी धरनीं ,
प्राण - पियारी ज्यों प्रियतम की।
अल्हड़ बाला सी झूमे ज्यों ,
मिले सखी से मस्त बसंती l
नेह रंग के मद में मत्त हो ,
मिल खिल खेले मीत से होली।
धरा राधिका , नभ भये मोहन ,
प्रकृति - पुरुष खेले संग संग होली ।
✍️
प्रसून मिश्रा
बाराबंकी
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