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प्यार की भाषा...

बड़ा मुश्किल समझना है अरे संसार की भाषा
हमारी तो ज़ुबां पे है फ़क़त इक प्यार की भाषा
करें हम क्या यही फ़ितरत, सभी से प्यार है हमको
नहीं हम सीख पाये हैं ज़हर ओ ख़ार की भाषा
ज़ुबां ग़र आप ना खोलें समझ फ़िर भी मैं' लेता हूँ
ज़ुबानी तेरे' नैनों की तिरे रुख़्सार की भाषा
गुज़ारिश है कि सीने में मुहौब्बत दफ़्न मत रखिये
अजी अब आप भी सीखें  दिली इक़रार की भाषा
रचनाकार- निर्दोष दीक्षित
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विधा= ग़ज़ल
शिल्प =१२२२, १२२२, १२२२, १२२२,
काफ़िया =आर
रदीफ़ = की भाषा

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