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एक बार आ जाते कन्हैया...

एक बार आ जाते कन्हैया...

एक बार जग में फिर से, आ जाते कन्हैया।
कि बड़ा व्यभिचार हो रहा..
जहां देखो वहां भ्रष्टाचार हो रहा,
कलुषित हुआ समाज नर - संहार हो रहा।

दिव्य दृष्टि डालो प्रभु ध्यान से देखो,
चारो तरफ तेरा ही मनुहार हो रहा।
एक बार जग में फिर से आ जाते कन्हैया।
कि दुःखी संसार रो रहा...

जब भी जिस रूप में आए हो कन्हैया,
संसार का संत्रास मिटाए हो कन्हैया।

अधरो पर लिए बांसुरी मुरली मनोहर लाल,
बचपन का वो नटखट, तेरा वो रूप निराला।
दिव्य छबि मोर मुकुट मन को मोह डाला।।
बार - बार याचना करू...
एक बार फिर से जग में आ जाते कन्हैया..
कि बड़ा अत्याचार हो रहा।।

जब  भी  बढ़ा है जग में अन्याय अत्याचार,
आए हो प्रभु बन के पालनहार।
फिर से जग को प्रेम का पाठ पढ़ा दो.....
कि बड़ा दुराचार हो रहा।।

एक तरफ अनीति अन्याय था पड़ा,
दूजे न्याय का स्वाभिमान था खड़ा,
जैसे पांच राजकुमारों को न्याय दिलाए हो,
सारे जग को गीता का पाठ पढ़ाए हो।
वैसे ही जग में एक बार आ जाते कन्हैया...
कि बड़ा दुःख दर्द का भरमार हो रहा।।

✍️
  रवीन्द्र नाथ यादव ( प्र.प्र.अ.)
 प्राथमिक विद्यालय कोड़ार बघोर नवीन, गोला, गोरखपुर।

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