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संयम

संयम

यह दुनिया चलती गाड़ी है,
हम सब उसकी बैठी सवारी हैं।
कब कौन सी ठोकर लग जाए,
हर मोड़ पर विपदा जारी है।।

यह देखो कैसी लापरवाही है,
इस करतब में कैसी बड़ाई है।
सब्र में ऐसी भी क्या बुराई है,
जो मांगी सबने मौत अनचाही है।।

कुछ सांसों की भागीदारी भी है,
कुछ मौत से रिश्तेदारी भी है।
कुछ रहते पग पग होश में जो,
जीवन के सदा उपकारी भी हैं।।

कुछ हवा में उड़ते शराबी भी हैं,
जो लगते मौत के व्यापारी हैं।
अब किसकी फिर से बारी है,
कल मटकी किसकी भारी है।।

घर पर सब आस लगाए बैठे,
पर माँ ही क्यों इतनी बेचारी है।
सावधानी से वाहन चलाओ,
तभी तो खुशियों में बरकरारी है।।

सूची में नाम और न बढ़ाओ,
मृत्यु दर में पहले ही उछाल भारी है।
जीवन चलती गाड़ी है,
संयम रखो जब तक धड़कन जारी है।।

✍️
शिवम भदौरिया
 फ़तेहपुर

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