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अजन्मी बच्ची की गुहार

अजन्मी बच्ची की गुहार

मां आने दो मुझको बाहर, मां आने दो मुझको बाहर,
मां मुझे देखना है बाहर से जो है सुंदर संसार।
1- मेरे मन के भाव बता क्या तुम को बतलाऊं मां,
इस छोटे से संसार में गीत प्यार के गाऊं मां,
मुझको प्यारा तुम कहती हो तो प्यारा ही मानोगी,
मुझको न्यारा तुम कहती हो  तो न्यारा ही मानोगी,
जब बाहर की दुनिया से मेरा हो जाएगा सरोकार,
तब सारे अरमान निकालूं, दूं अपने सपनों को आकार।
मां आने दो मुझको बाहर....
2- मां डर लग रहा मुझे बहुत अनचाहे डर ने घेरा है,
जल्दी से ले लो आंचल में डूब रहा मन मेरा है,
मैं तुमसे दूर नहीं हूं मां, एक तेरा ही तो सहारा है,
ऐसी हिम्मत देना मुझको फिर डर ना किसी का दोबारा हो,
जीने का अधिकार न छीने कोई ऐसा सुंदर हो विचार,
कर्मों से विस्मित मैं कर दूंगी आने दो बस मुझको बाहर।
मां आने दो मुझको बाहर...
3- सुख- दुख के ताने-बाने का ,मुझको अनुपात बिठाना है,
जैसी ढृढ़ शक्ति है मां तेरी,मुझको भी वही दिखाना है,
कितने तानों को सुनकर भी मां धीरज जरा नहीं खोती,
अपनी बच्ची की चिंता में हर पल जगती क्यों न सोती,
मां कोई नहीं है तुम जैसा सारे पर्याय अधूरे हैं,
बस इतना ही कहूंगी मां जन्मदात्री हो मेरी ईश्वर।
मां आने दो मुझको बाहर...

स्वरचित
नम्रता श्रीवास्तव (प्रधानाध्यापक)
प्राथमिक विद्यालय बड़ेहा स्योंढा 
महुआ (बांदा)

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