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उपवन में अंधेरा

उपवन में अंधेरा

इस उपवन में सहसा देखो
छाया घनघोर अंधेरा है
उपवन अब उपवन ना रहा
किसका इसपे पहरा है ।

          उपवन की छटा भी अब
          कुछ धूमिल धूमिल लग रही
          मानो उसकी पंखुड़ियों से
          उसकी श्वास निकल रही।

उपवन को उपवन रहने दो
ना उसका तुम संहार करो 
पेड़ लगा कर उन्हे ना काटो
बस इतना उपकार करो।

         धरती का श्रृंगार है तरु
         इसका श्रृंगार ना मिटने दो
         जंगल पहाड़ नदियों को तुम
         हरा भरा ही रहने दो।

पेड़ो को ऐसे हम पाले
जैसे संतान हमारी हो
पर्यावरण जीवन का घोतक
इनसे पहचान हमारी हो।

        उपवन को हम खूब फैलाए
        चारो तरफ हरियाली लाए
        चिड़ियों के संग हम भी चहचहाए
        आओ मिलकर पर्यावरण बचाएं।।

✍️
साधना सिंह(स.अ.)
खजनी, गोरखपुर

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