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नन्हे पंख


बड़े कोमल
नन्हे सजीले से
पंख है इन
नौनिहालों के।
हां यही जो
आपके सम्मुख
हर एक दो घण्टो
के बीच
उचकते, खेलते,
हँसते, चिढ़ाते,
रोते, बिलखते
किसी भी
रूप-स्वरुप में आते रहते है।
स्कूलों में
इन नन्हे कोमल रंगीन
फूलों का मेला
प्रति दिन लगता है।
रंग-बिरंगे
जूही, मोगरा, गेंदा
मोतिया, चंपा
गुलमोहर की खुशबू
समेटे;
उछलते, महकते,
चहकते बच्चे।
प्यारे सलोने
कोई गुड़िया
कोई राजकुमार
कोई आँखों का तारा
कोई रतनार
किन्ही अपनों का
या हमारे अपने सपनो का।
हम इनकी ऊँगली पकड़
माता पिता बन
चलाते है;
और शिक्षक बन
इनके विस्तार को
दिशा देते है।
इनके पंखों को
आसमान दिखाते है
इन्हें उड़ाते है।
नन्हे पंख है इनके
ज़रा सम्भलकर
आपकी डाट
किसी दमित
डरपोक दब्बू
मन को न जन्म दे
इन नव पल्लवों में।
इन नन्हे कोमल
पंख वालो को
सतरंगी आसमान
देना है हमें।
उल्लास उजास से
भरा नन्हे इन
नौनिहालों को पूरा
सम्मान देना है हमें ।
इनकी किलकारियों को
उजालो का आह्वान देना है हमें।


लेखक :
✍  शानू दीक्षित
प्राथमिक विद्यालय मोटेपुरवा
नरैनी ब्लॉक जनपद बांदा
उत्तर प्रदेश

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