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ग़ज़ल

 गजल-रुख से परदा जरा सा हटा लीजिए

रुख से परदा जरा सा हटा लीजिए । 

अपना जलवा हमें भी दिखा दीजिए ।

जिंदगी भर नशा अब ना उतरेगा ये 

जाम उलफत का हमको पिला दीजिए। 

हम तो बैठे हैं कब से इसी आस में।

अपनी नज़रों को हमसे मिला लीजिए।

हम अकेले ही बातें कियें जा रहे हैं।

मेरे लफ्जों से लफ्जों को मिला लीजिए।

हम अकेले ही तन्हा चले जा रहे।

मेरे कदमों से कदमों को मिला लीजिए।

जिंदगी में बहुत रंज झेले हैं हम।

मेरे गम को भी अपना बना लीजिए ।

हम ने ख्वाबों में अक्सर है देखा तुम्हें।

मेरे ख्वाबों को हकीकत बना दीजिए।

हम अकेले ही तन्हा जिये जा रहे।

हमसफर जिंदगी का बना लीजिए।


✍️

मोहम्मद जियाउल हक अंसारी (स०अ०)कम्पोजिट पू०मा०वि०सजीवन वि०क्षे०-बाँसगाँव ,जनपद-गोरखपुर

ए०आर०पी० हिन्दी - खोराबार, जनपद-गोरखपुर 


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