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मम तात

अपने पिता को समर्पित मेरे शब्द भाव

मम तात


धीर,वीर,गंभीर हृदय ,अनुशासित मेरे तात,
निश्छल, विह्वल,कोमल फूलों जस है उनके जज्बात।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

सागर सा गंभीर हृदय है,अधरों पर मुस्कान,
जन्म दिया पाला पोसा,दिखाया हमे जहान।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

गेह की सौंधी खुश्बू आपकी,सदा रहती मेरे पास,
आप से ही नित चलती रहती हम बच्चों की श्वांस।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

परम पूज्य मेरे पापा हैं हम सबकी आप छाँव,
बिना आप जग में न कोई दूजा मेरा ठाँव ।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

सादर नमन वंदन करती हूं, कोटि-कोटि आभार,
जग में ला के दिया आपने हमें अम्बर भर प्यार।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

विषधर बन के अपनों ने, सदा छला मम तात ,
फिर भी विषाद को दूर कर,उन्हें लगाया माथ।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

जीवन बिता मातु बिन तात आप नित साथ,
कमी कभी महसूस न हो ,खुद मन मे रखते जज्बात।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

अथक परिश्रम से पाला-पोसा,रहे सदा निर्भीक,
आप के ही बल पर पापा खड़ी है घर की भीत।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

सम्पूर्ण जगत में मात-ुपितु जस नही है दूजा नाम,
चरणों मे करुँ सुमन समर्पित,ममता अंजुरी बांध।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

धीर,वीर ,गंभीर हृदय है मन कोमल एहसास,
है आपका वरद हस्त तो चलती मेरी श्वांस।
मेरे पापा नमन करती हूं मैं......

✍️
ममता प्रीति श्रीवास्तव
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

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