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नारी अबला कैसे बनी

नारी अबला कैसे बनी

नारी अबला कैसे बनी ?
अबला बनाया किसने उसे,,?
उत्पीड़न के वेग द्वंद में,,,
अविरल नित बहाया किसने उसे ?
अत्याचारों से पीड़ित कर,,
चिता पर बैठाया किसने उसे ?
है हर राह में कांटे..... भटकते,,
 साएं है अनहोनियों के !!
नहीं सुरक्षित तू कहीं एक पल भी
यह डर पल ..प्रतिपल ..हृदय में आया कैसे उसे !
क्यों करते हो ,,रे !  मानव तू
यह देवी पूजा का विधान ,,,,हर ऋतु में ,,,जब उस देवी को 
भोग विलास का साधन समझ..  कुचल मिट्टी में,,... मिलाया उसे !
हर प्रतिकार का वह हिस्सा बनती
भ्रूण हत्या ,दहेज सबकुछ सहती 
प्रतिदिन होती ओछी हरकत तक
हर रोज पहुंचाया किसने उसे ?
जीती जागती सृजनकर्ता धरा की
वृहद  विषाद में  ढकेल ....
निष्प्राण बनाया ,,,,,किसने उसे ? आनंद दायिनी बन आंगन में
मंजरी सी सुरभि फैलाती है ।
फिर...! कुचल अवघात कर कोमल तनु....
मरणासन्न मन तक 
पहुंचाया किसने उसे ?
सुता ,सहोदरा ,सहचरी,,, बन
नित्य कर्म से जीवन समर्पित करती,,,, फिर,,, सूक्ष्म बना
तिरस्कृत कर,,,, नजरों में सबके
गिराया किसने उसे ?
निर्मल उत्स सी बहकर
मृदु मुस्कान भरे हर आनन पे
पर ,,,,,उसके आनन को विभीषिका की लकीरों तक पहुंचाया किसने उसे ?
अपने सम्मान, अहंकार की वेदी पर ,,,,हर युग में हवन चढ़ाते हो।
विशिष्ट देवी बना उसे 
क्रूरता भरा हाथ उठाते हो ।
 प्रतिदिन लुटती अस्मिता की
इस अमानवीयता तक ,,...!
आखिर ,,,पहुंचाया किसने उसे ?
न पूजो न  लक्ष्मी रूप बनाओ हमें
नजरों में बस बेटी सा सम्मान दिलाओ हमें...।
उन प्रति ध्वनियों को सुनो
जो मानव हृदय में विकसित है ,,,,,
सोचो, समझो ,परखो ,देखो,,,उन
अनभिज्ञ, मासूम ,,,,बेबस ,,कोमल
दुहिताओ को ,,,,।
 अभिध्या की धधकती ज्वाला तक ,,,!
प्रतिदिन पहुंचाया किसने उसे ?
हर युग ,,,हर सदी ,,,अजीवन पीड़ा सहने तक ,,,
आखिर पहुंचाया किसने उसे ?
"नारी को अबला बनाया किसने !!

✍️
दीप्ति राय (दीपांजलि )
सहायक अध्यापक 
प्राथमिक विद्यालय रायगंज क्षेत्र- खोराबार,गोरखपुर

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