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विवशताएँ एक नहीं

क्षमता नहीं थी उसकी लेकिन वार पे वार किये जा रही थी।भय से आक्रांत वह चिल्लाये जा रही थी। कक्षा 1 में पढ़ने वाली उसकी बहन शौचालय के दरवाजे पर अंदर की ओर लगातार धक्के दे रही थी।दोनों की चिल्लाहट सुनकर मैं भागा-भागा बाहर आया।बड़ी बहन कहने लगी कि "दरवाजा राहुल ने बन्द कर दिया और भाग गए,लल्ली अंदर बन्द हो गयी है।"
भीड़ लग गयी थी।स्कूल की बात बाहर बड़ी तेजी से फैलती है,और अभिभावक स्कूल में दंडाधिकारी बनकर आते हैं।इसलिये मैंने सावधानी बरती,सभी बच्चों को वहां से भगाकर क्लास में किया केवल उस लड़की को रोके रखा। अंदर बाहर दोनों भय से लगातार चिल्लाये जा रही थीं कि उन्हें कुछ भी समझा पाना मुश्किल हो रहा था।कुण्डी खुली थी मैंने दरवाजे पर धक्का दिया तो भी वह न खुला। धक्का और जोर से लगाया,फिर भी वह न खुला।मुसीबत यह थी कि अंदर 2-3 साल की लड़की दरवाजे से चिपक के खड़ी थी,उसे चोट लगने का भी भय था। धक्के से मैंने अंदाजा लगा लिया कि दरवाजे में कोई दिक्कत न थी बल्कि दरवाजा अंदर से बन्द था और वह लड़की खोलने का तरीका नहीं जानती थी।दरवाजे में बाहर से कोई छेद न था। 
बाहर से उस 2-3 साल की लड़की को खोलने का तरीका समझा पाना बेहद मुश्किल था।एक तो वह चिल्लाये जा रही थी इसलिये कोई भी बात सुन न सकती थी। दूसरे मैं उसकी बोली में बात नही कर सकता था और खड़ी बोली वह समझ न पा रही थी। बड़ी मुश्किल से यह कहकर शांत कराया कि चुप हो जा तब खोलेंगे। सिटकिनी दरवाजे के बीच में किनारे पर लगी थी जो बायीं तरफ जाकर दीवार में घुसती थी।और फिर उसका मुँह नीचे गिर जाता था। मैंने दरवाजे को अपनी ओर खींच दरवाजे को ढीला किया।फिर सिटकिनी को पकड़ उसका मुंह उठाकर बीच में कराया,फिर उसे दायीं ओर सरकाने को कहा।
तकरीबन 1 घंटे में उसे खोलना सिखा पाया और वह बाहर आई। 50 बच्चों पर 15-20 फ्री आते थे,उनकी माएं मजदूरी करने जाती थीं और छोटे बच्चों को खेलाने के लिए स्कूल भेज दिया करती थीं।स्कूल में ये छोटे बच्चे ऐसा रोना मचाते थे कि पढ़ाना दूभर हो जाता था।उन्हें भेजें भी तो कहाँ,जब घर पर कोई न था।बच्चे खाते ज्यादा थे ,mdm में चढ़ते कम थे। इन बच्चों ने स्कूल में कैसी कैसी परेशानियां खड़ी कीं,लिखने लगूँ तो पूरी किताब बन जाय। शिक्षण कार्य में कितने व्यवधान उतपन्न किये, कोई अधिकारी क्या समझेगा। गुणवत्ता नहीं है, का दोषारोपण करेगा केवल,कारण क्या क्या रहा,इससे उसका कोई सरोकार नही। 

 लेखक
मनीराम मौर्य
उ0प्रा0वि0 हरिवंशपुर,
वि0क्षे0-पौली, जनपद-संत कबीर नगर

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