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आओ मिलकर अलख जगाएँ!!



आओ मिलकर अलख जगाएँ, 
नवाचार विद्यालय में  लाएँ,
शिक्षण में गुणवत्ता लाकर,
पाठ्यवस्तु को रुचिकर बनाएँ |
आओ मिलकर अलख जगाएँ,
नवाचार विद्यालय में लाएँ!!


तकनीकी का करें प्रयोग,
गतिविधियों से जुड़े हर रोज,
खेलविधि से शिक्षण देकर,
मोड़े बच्चों को पढ़ाई की ओर,
सृजनात्मक परिवेश बनाकर,
रचनात्मक गुण करें उजागर!!
आओ मिलकर अलख जगाएँ,
नवाचार विद्यालय में लाएँ!!


कुछ खुद करें, के बच्चे करें,
"करके सीखने"का कौशल बढ़े,
बालकेन्द्रित शिक्षा देकर,
बच्चों को "भयमुक्त "करें,
कविता -कहानी सुने-सुनाएँ,
अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ाएँ!!!
आओ मिलकर अलख जगाएँ,
नवाचार विद्यालय में लाएँ!!


तिमिर के बादल गए अब छट,
नवप्रभात हो चला है  अब,
कायाकल्प हो चला भवन में,
चित्रो का करके समावेश,
अनुशासन, सहयोग सिखाकर, नैतिकता का पाठ पढ़ाएँ!!
आओ मिलकर अलख जगाएँ,
नवाचार विद्यालय में लाएँ!!


माटी की मूरत,भोली सी सूरत,
पंख पसार उड़े नभ पर,
गिर-गिर, उठ-उठ बढ़ चले,
देखो प्रगति के पथ पर,
भारी बस्ते का बोझ हटाकर,
खो रहे बचपन को हम बचाएँ!!
आओ मिलकर अलख जगाएँ, 
नवाचार विद्यालय में लाएँ,
शिक्षण में गुणवत्ता लाकर,
पाठ्यवस्तु को रुचिकर बनाएँ !!!!


रचयिता
सारिका रस्तोगी,  
सहायक अध्यापिका ,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय,
फुलवरिया, जंगल कौड़िया,

गोरखपुर!!


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